संधिशोथ तथा दर्द निवारक
संधिशोथ अथवा जोड़ो की सूजन बढ़ती उम्र में एक सामान्य समस्या है तथा वृद्ध व्यक्तियों में तीन में से एक सर्वाधित सामान्य समस्या है।
संधिशोथ अनेक प्रकार के होते हैं, जिनमें ओस्टियो आर्थिराईटिस सबसे अधिक पाया जाता है।
ओस्टियो आर्थिराईटिस, सही रुप में, इसका संबंध सूजन से नहीं है लेकिन यह आयु से
संबंधित अपकर्षक रोग है। यह रोग शरीर के निचले अंगों में भार वहन करने वाले अंगों पर होता है,
जिसमें हाथों के साथ गर्दन और पीठ शामिल है। कभी दर्द होता है और कभी दर्द नहीं होता है
तथा यह हल्के से गम्भीर हो सकता है।
संधिशोथ की अनेक किस्मों को न तो रोका जा सकता है और न ही इनका उपचार किया जा सकता है। संधिशोध के उपचार का लक्ष्य दर्द से मुक्ति दिलाना तथा प्रभावित जोड़ों के कार्यों की पुनर्स्थापना करना है।
संधिशोथ के उपचार में आराम, वजन में कमी, फिजियोथेरेपी, शारीरिक व्यायाम तथा दर्द को दूर करने के लिए औषध उपचार शामिल होता है।
संधिशोथ से संबंधित दवाओं का वयोवृद्ध व्यक्तियों द्वारा सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है। सभी दर्द निवारक औषधियों में नॉन स्टेरॉयडल एन्टी-इन्फलेमेट्री ड्रग्स (एनएसएआईडी) औषधियों के नुस्खे सबसे अधिक लिखे जाते हैं।
यह औषधियां शरीर में उन रसायनों के निर्माण को रोकती हैं जिनसे दर्द, कड़ापन तथा सूजन होती है। एनएसआईएडी द्वारा अपना कार्य आरम्भ करने में कुछ दिनों से लेकर सप्ताह का समय लगता है तथा 2-3 सप्ताहों में इन दवाओं का पूरा प्रभाव दिखाई देने लगता है।
बार बार प्रयोग में लाई जाने वाली कुछ एनएसआईएडी दवाओं की सूची नीचे दी गई है। इनमें से अधिकांश दर्द निवारक दवाओं के समान प्रभाव तथा दुष्प्रभाव होते हैं।
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जातिगत नाम
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ब्रैंड नाम
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एस्प्रिन
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डिस्प्रिन
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निमेसुलाइड
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निमुलिड, नाइस
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मेलोक्सीकैम
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मेलफ्लेम, एमकैम
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इबुप्रोफेन
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ब्रूफेन
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डिक्लोफेनेक
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वोवेरान
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पिरोक्सीकैम
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पिरोक्स
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पैरासिटामोल
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क्रोसिन,कालपोल
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सेलेकोक्सिब
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सिलेक्ट,रेविब्रा
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एनएसआईएडी के दुष्प्रभाव
बहु अपेक्षित दर्द से राहत के साथ एनएसआईएडी के कारण कुछ व्यक्तियों में अवांछित दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
इन दुष्प्रभावों में पेट का अल्सर, छाती में जलन, मतली, पेट दर्द, उल्टी आना, अतिसार तथा पेट की आंतों में
रक्तस्राव शामिल हैं। पेट की आंतों में रक्तस्राव खून की उल्टियों अथवा काले रंग के शौच से परिलक्षित हो सकता है।
एनएसआईएडी से सिरदर्द, चक्कर आना तथा आंखों के आगे धुंधलापन भी हो सकता है।
यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको इसकी जानकारी तुरंत अपने डाक्टर
को अवश्य देनी चाहिए। कुछ मामलों में दुष्प्रभावों को न्यूनतम रखने के लिए उपचार में फेर बदल
करने की आवश्यकता पड़ सकती है।
दुष्प्रभावों को कम करने के लिए, एनएसआईएडी को खाना खाने के बाद लिया जाना चाहिए।
इसके साथ साथ अल्सर रोधी दवा अर्थात ओमेपराजोल (ब्रैंड नाम ओमेज़, ओसिड तथा प्रोटोलोक) से पेट के अल्सर को रोका जाता है।
एनएसआईएडी से उत्पन्न होने वाली पेट संबंधी बीमारियां धूम्रपान करने वाले तथा एल्कोहल का सेवन करने वाले व्यक्तियों में अधिक पाई जाती हैं।
कोर्टीकोस्टेरॉयड
कुछ प्रकार के संधिशोथ में कोर्टीकोस्टेरॉयड भी सूजन को कम करते हैं।
इन्हे गोली के रुप में अथवा सूजे हुए अंग में इंजेक्शन द्वारा लगाया जाता है
तथा कोर्टीकोस्टेरॉयड तुरंत सूजन को कम कर देते हैं तथा दर्द से राहत से अस्थाई राहत दिलवाते हैं।
तथापि, कोर्टीकोस्टेरॉयड, के गम्भीर दुष्प्रभाव होते हैं जिनमें इंजेक्शन से प्रति निम्न प्रतिरोध, बदहजमी,
वजन में वृद्धि, मांसपेशियों की शक्ति में कमी, स्वभाव में परिवर्तन, आंखों के आगे धुंधला पन, मोतियाबिन्द,
मधुमेह, हड्डियों की भंगुरता (ओस्टियोपोरोसिस) तथा उच्च रक्त दाब शामिल हैं।
कोर्टीकोस्टेरॉयड एक बहुत ही उपयोग दवा है लेकिन इसे केवल चिकित्सीय पर्यवेक्षण के अधीन लिया जाना चाहिए।
साबित न की गई दवाएं
जीर्ण संधिशोथ से पीड़ित व्यक्ति अक्सर चिकित्सा की वैकल्पिक विधियों की खोज करते हैं।
अनेक प्रकार की गोलियां, उपकरण तथा आहार आदि को संधिशोथ के उपचार के लिए सुझाया जाता है।
चूंकि संधिशोथ से संबंधित दर्द आता जाता रहता है इसलिए, अनेक लोग यह सोचते हैं कि यह इलाज
वास्तव में प्रभावी साबित हो रहे हैं। आपको किसी गोली अथवा उपस्कर जिससे यह कहा जाता है कि संधिशोथ ठीक हो जाता है,
के प्रति सावधान रहना होगा क्योंकि अधिकांश किस्म के संधिशोथ को ठीक नहीं किया जा सकता है।