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गिरना आदि तथा दुर्घटनाएं

गिरना आदि तथा दुर्घटनाएं “ऐसे ही नहीं ” हो जाती हैं। अक्सर दुर्घटना के घटित होने के लिए स्थिति प्रतीक्षा करती है और इसलिए इसे रोका जा सकता है।

वृद्धावस्था में गिरने के बहुत ही भयानक परिणाम होते हैं। इनसे चोट, हड्डी का टूटना आदि जैसी घटनाएं घटित होती हैं तथा व्यक्ति सक्रिय, स्वतंत्र जीवन नहीं जी पाता है। गिरने के कारण हजारों वृद्ध पुरुष और महिलाएं अशक्त हो जाते हैं, उनकी हड्डी आदि टूट जाती है, तथा अक्सर स्थाई रुप से उनके साथ ऐसा होता है। यहां तक कि केवल गिरने का डर ही उनके लिए मनोवैज्ञानिक रुप से निशक्त कर देने वाला होता है।

तथापि, अपने आसपास के परिवेश में सामान्य परिवर्तन करके तथा कार्य की सुरक्षित पद्धतियों को अपना कर गिरने तथा चोट आदि लगने से बचा जा सकता है ।

वृद्धावस्था में गिरने के कारण

  • नजर, श्रवण, मांसपेशियों की ताकत, समन्वय और रिफलैक्सिस में परिवर्तन के कारण वयोवृद्ध व्यक्तियों के गिरने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसके साथ साथ, ह्दय, मस्तिष्क, हड्डियों तथा जोड़ों, थॉयरॉयड तथा मधुमेह रोगों के कारण संतुलन तथा चाल प्रभावित हो सकती है। रुग्णता के लिए अनेक औषधियों के कारण भी चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना तथा गिरने आदि की घटनाएं होती हैं।
  • गिरने की अधिकतर घटनाएं शयनकक्ष तथा स्नानघर में उचित प्रकाश व्यवस्था के अभाव, फिसलने वाले फर्श, फर्श पर गिरी पुस्तकों तथा कागजों तथा आसपास के माहौल में छोटी मोटी रुकावटों के कारण होती हैं।

गिरने तथा दुर्घटनाओं की रोकथाम

गिरने तथा दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अनेक सामान्य कदम उठाकर इनकी संभावना को कम किया जा सकता है तथा हमारे घर और परिवेश को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

  • आपके द्वारा ली जा रही दवाओं के दुष्प्रभावों के संबंध में चर्चा अपने डाक्टर के साथ करें और इस बात की पुष्टि करें कि क्या इनसे आपका समन्वय और संतुलन प्रभावित होता है। उससे गिरने की संभावनाओँ को कम करने के लिए उपायों के संबंध में पूछें।
  • एल्कोहल संतुलन तथा रिफलेक्सिस को प्रभावित कर सकती है, इसलिए विशेष रुप से वाहन चलाने से पहले एल्कोहल का सेवन कम करें।
  • खाना खाने के बाद एक दम शीघ्रता से उठते समय, नींद से जागते समय, नीचे बैठते समय, अथवा लम्बे समय तक आराम करते समय सावधानी बरतें। रक्त दाब में तेजी से कमी हो सकती है तथा जिससे चक्कर आने से आप गिर सकते हैं।
  • असंतुलित अथवा अनजान जगह पर अथवा यदि आपको चक्कर आदि आते हैं तो संतुलन को बनाए रखने के लिए छड़ी अथवा वाकिंग स्टिक, अथवा वॉकर का प्रयोग करें। घर के बाहर गीले फर्श पर चलते समय विशेष सावधानी का प्रयोग करें।
  • ऐसे जूते पहने जो कि सहारा देने वाले, रबड़ के सोलयुक्त, कम हील वाले हों। सीढ़ियों अथवा फिसलन युक्त फर्श पर चिकने सोल वाले जूते अथवा स्लिपर्स पहनने से बचें।
  • व्यायाम का नियमित कार्यक्रम बनाए रखें। नियमित शारीरिक कार्यकलापों से बल तथा मांसपेशियों की ताकत में वृद्धि होती है जिससे जोड़ों, कंडराओं तथा अस्थिबन्धों को अधिक लोचशील रखते हुए आसपास घूमना अधिक आसानी से संभव हो पाता है। वजन उठाने वाली हल्की गतिविधियों से हड्डियों के ओस्टेयोपोरोसिस के कारण क्षय होने को रोका जा सकता है।
  • निम्नलिखित को सुनिश्चित करके घर को अधिक सुरक्षित बनाया जाना चाहिए :
    • सीढ़ियों, कॉरीडोर, स्नानघर में अच्छी प्रकाश व्यवस्था ;
    • बिजली के स्विचों, टेलीफोन तथा रोजमर्रा की प्रयोग में लाई जाने वाली वस्तुओं तक सहज पहुंच;
    • सीढ़ियों तथा स्नानघर में हैंडरेल तथा पकड़ने के लिए बार्स होनी चाहिए ;
    • स्नानघर में पानी इकठ्ठा होने से रोकने के लिए तथा फिसलन वाले फर्श न हों इसके लिए उचित रुप से डिजाइन किए गए फर्श होने चाहिए ;
    • आने जाने के रास्ते से बिजली की तारों तथा टेलीफोन की तारों को दूर लगाया जाना चाहिए ;
    • बिस्तर तथा कुर्सी पर बैठने या उतरने में सरलता के लिए उनकी ऊंचाई उचित होनी चाहिए ;
    • बाहरी सीढ़ियां तथा आने जाने के रास्तों की बेहतर मरम्मत होनी चाहिए।
  • वृद्धावस्था में जलना आदि एक सामान्य बात है तथा ऐसे वयोवृद्ध व्यक्ति जिनकी रोगोपचार की क्षमता बहुत धीमी होती है उनके लिए यह बहुत ही कष्टदायक हो जाता है। कुछ सामान्य उपायों से जलने का जोखिम बहुत कम किया जा सकता है।
  • वृद्ध व्यक्तियों की वाहन की दुर्घटना के कारण मृत्यु दुर्घटना से होने वाला एक सामान्य कारण होता है।
  • ऐसे व्यक्ति जो कि गाड़ी आदि चलाते हैं उन्हे यह पता होना चाहिए कि आयु संबंधित परिवर्तनों जैसे चमक के प्रति संवर्धित संवेदनशीलता, न्यून समन्वय तथा धीमा प्रतिक्रिया समय आदि के कारण उनकी वाहन चलाने की क्षमता नकारात्मक रुप से प्रभावित हो सकती है। इस प्रकार की नकारात्मक क्षमताओं की प्रतिपूर्ति धीमी गति से वाहन चलाकर, कम वाहन चलाने तथा रात्रि और भीड़ के समय गाड़ी को कम चलाते हुए की जा सकती है।
  • सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का प्रयोग करते समय:
    • सजग रहें तथा बस जब धीमी हो रही हो और मुड़ रही हो तो अपने आप को उसके लिए तैयार कर लें।
    • वाहन में बैठते अथवा उतरते समय फिसलन युक्त फर्श आदि तथा अन्य जोखिमों का ध्यान रखें।
    • रेजगारी आदि के समय जेबे आदि टटोलते समय अपना संतुलन बिगड़ने से रोकने के लिए किराए की राशि अपने पास तैयार रखें।
    • अपने साथ बहुत से पैकेज आदि साथ लेकर न चलें तथा रेलिंग को पकड़ने के लिए अपने एक हाथ को खाली रखें।
    • गलियों को धीरे तथा सावधानी से क्रॉस करें तथा प्राधिकृत क्रासिंग से सड़क पार करें।
    • सड़कों को पार करने में, विशेष रुप से खराब मौसम में अतिरिक्त समय लें।
  • रात्रि में हल्के रंग के कपड़े पहने तथा अपने साथ फ्लैशलाइट ले कर चलें।
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