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स्वस्थ हड्डियां

हड्डिया जीवित ऊतक होती हैं जो कि नई हड्डियों के सृजन तथा पुरानी हड्डियों के क्षय के साथ जीवन भर निरन्तर परिवर्तित होती रहती हैं। सचल तथा आत्म निर्भर रहने के लिए हमें अपनी हड्डियों को रोग से बचा कर उन्हें स्वस्थ बनाए रखना होता है। लगभग 35 वर्ष की आयु तक हड्डियों की ताकत में वृद्धि होती रहती है, तथा इस अवधि के दौरान पुरानी हड्डियां तेजी से क्षय होती हैं तथा उनके स्थान पर नई हड्डियों को सृजन होता है। कुछ पुरुषों, तथा महिलाओं में बार बार, हड्डियों का यह क्षय बहुत अधिक गम्भीर होता है। उनकी हड्डियां कमजोर, नाजुक हो जाती हैं और उनमें टूटने की संभावना बढ़ जाती है। इस स्थिति को ओस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। अब हमें इस बात की जानकारी है कि किस प्रकार से इस रोग से हड्डियों की किस प्रकार से रक्षा की जाए तथा उन्हें सुदृढ़ बना कर रखा जाए।

हड्डियों को टूटने से बचाना

60 वर्ष से अधिक की आयु की चार में से एक महिला तथा आठ में से एक पुरुष की ओस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डी टूटने का शिकार होना पड़ता है। कूल्हे, रीढ़ तथा कलाई की हड्डी टूटने की संभावना सबसे अधिक होती है। महिलाओं को इसका जोखिम अधिक होता है क्योंकि रजोनिवृति के दौरान तथा उसके उपरांत ओस्ट्रेजोन नामक हारमोन में कमी के कारण उनमें हड्डियों को क्षय तेजी से होता है। इस चरण में हारमोन प्रतिस्थापन थेरेपी से हड्डियों के क्षय को रोका जा सकता है। पीड़ा होने के साथ साथ, हड्डी के टूटने से आत्मनिर्भर जीवन में कठिनाई होती है तथा सचलता से संबंध में दीर्घकालिक कठिनाईयां पैदा हो सकती हैं। कितने भारतीय व्यक्तियों को ओस्टियोपोरोसिस है, इसकी सही सही जानकारी नहीं है। सामान्य निम्न पौष्टिकता स्थिति तथा दोषपूर्ण जीवन शैली के कारण ऐसा अनुमान है कि इनकी संख्या बहुत अधिक हो सकती है। किसी भी आयु में हड्डी को टूटने से बचाने के लिए व्यक्ति द्वारा कुछ सामान्य उपाय किए जा सकते हैं।

जैसे जैसे आपकी आयु बढ़ती है, आपके गिरने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए यह आपके लिए महत्वपूर्ण है कि आप अपने घर की बनावट को जहां तक हो सके सुरक्षित बनाएं। आपके द्वारा उठाए जाने वाले कुछ सामान्य व्यवहारिक कदम निम्नलिखित हो सकते हैं :

  • ऐसी किसी भी चीज का ध्यान रखें जिससे आपको फिसलने अथवा गिरने का डर हो।
  • दिन प्रतिदिन की प्रयोग में आने वाली वस्तुओं को उचित ऊंचाई पर रखें ताकि आपको उन्हें उठाने के लिए अपने आप को खींचना अथवा झुकाना न पड़ें।
  • कारीडोर तथा सीढ़ियों आदि में प्रकाश की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।
  • नियमित रुप से अपनी आंखों की जांच करवाने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि आपकी नजर ठीक है।
  • कैल्शियम और विटामिन डी युक्त भोजन

हड्डियों को मजूबत, विशेषरुप से बढ़ती उम्र में उन्हें सुदृढ़ बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन करना चाहिए। कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर पदार्थों में दूध तथा दूध के उत्पाद, फलियां, पालक, बादाम आदि और सूखे मेवे शामिल हैं। विटामिन डी तथा कैल्शियम की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए वयोवृद्ध व्यक्ति बाजार में उपलब्ध कैल्शियम की गोलियों का सेवन कर सकते हैं, 500 मि.ग्रा. पुरुषों के लिए तथा 1000 मिग्रा. महिलाओं के लिए।

स्वस्थ जीवनशैली

  • व्यायाम से हड्डियों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। नियमित रुप से तेज तेज चलते हुए सैर करने से आपकी हड्डिया मजबूत रहेंगी। इससे आपके संतुलन तथा समन्वय में भी सुधार होता है तथा आप गिरने आदि से भी बच जाते हैं।
  • एल्कोहल तथा तम्बाकू हड्डियों के लिए हानिकारक होते हैं तथा उनसे अवश्य ही बचा जाना चाहिए।
  • चाय तथा काफी और कोला पेय पदार्थों का आवश्यकता से अधिक सेवन भी हड्डियों के लिए हानिकारक होता है, इसलिए इनसे बचा जाना चाहिए।

यदि आपको कभी अस्थि भंग हुआ है अथवा आपको पीठ में दर्द रहता है, ऊंचाई नहीं बढ़ रही है अथवा आपकी पीठ झुकी हुई रहती है तो आपकी हड्डियां भंगुरतायुक्त हैं अथवा आपको ओस्टियोपोरोसिस है। अपने डाक्टर से बात करना अच्छा रहेगा ताकि आपकी स्थिति का मूल्यांकन किया जा सके तथा वर्तमान में उपलब्ध उचित इलाज की आपको सलाह दी जा सके।

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