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वसीयत का महत्व

वसीयत बनाने के महत्व को नकारा नहीं जा सकता है। उचित रुप से तैयार की गई, विधिवत रुप से वैध वसियत ही एक मात्रा उपाय है जिससे आप की मृत्यु के उपरांत आपकी जमापूंजी तथा धारित वस्तुएं ऐसे लोगों को मिलती है तथा उन उद्देश्यों के लिए जाती हैं जिनकी आप को चाहत थी। लोगों को अपनी व्यक्तिगत इच्छाएं बता देना ही पर्याप्त नहीं है। यदि आप बिना वसीयत बनाए अर्थात निर्वसीयत मर जाते हैं तो कानून अंतिम रुप से यह फैसला करेगा कि किसे क्या मिलेगा। इसलिए, वसीयत बनाना वित्तीय प्लानिंग का एक अहम हिस्सा है। वसीयत स्वयं द्वारा अर्जित आस्तियों तथा सम्पत्तियों पर लागू होती है। संयुक्त परिवार तथा हिन्दू अविभाजित परिवार सम्पत्ति की वसीयत नहीं की जा सकती है, यहां तक की कर्ता सम्पत्ति में अपने हिस्से को छोड़कर ऐसा नहीं कर सकता है।


यदि आप वसीयत नहीं बनाते हैं तो क्या हो सकता है?

यदि आप निर्वसीयत मर जाते हैं तथा आपका कोई परिवार अथवा रिश्तेदार नहीं है, तो आपकी समस्त जमा पूंजी और धारित वस्तुएं राज्य को सौंप दी जाती हैं। यदि आपके वारिस हैं तो आपकी आस्तियों को निर्वसीयत संबंधित कानून के अनुसार उनमें बांट दिया जाता है। आपके वारिसों को आपकी सम्पदा का बंटवारा करने के लिए न्यायालय में आवेदन देना होगा। ऐसा करने के लिए आमतौर पर उन्हें कानूनी सहायता लेनी पड़ेगी। यह मंहगा हो सकता है तथा इस पर आने वाले व्यय को आपकी सम्पदा में से दिया जाएगा। जब तक हर पहलू को सुलझाया जा रहा है तब तक उसमें देरी लग सकती है और बैंक खातों के लेनदेन पर रोक लगाई जा सकती है। आम भाषा में कहा जाए तो, बिना वसीयत के आप अपने पीछे उस समय बहुत अधिक संशय तथा तनाव छोड़ जाएगें जब आपके प्रिय जन बहुत अधिक भावनात्मक दबाव के दौर से गुजर रहे होंगे और जिस दौरान न्यायालय द्वारा हिस्से और अधिकारों का निर्णयन किया जा रहा है होगा, तो इसके साथ उच्च कानूनी खर्चे भी उठाने पड़ते हैं।

निर्वसीयतता संबंधी कानून जटिल है। लेकिन, दो महत्वपूर्ण बातें हैं जो आपको जान लेनी चाहिए:


  • यदि आप निर्वसीयत मर जाते हैं, तो आपकी पत्नी तथा अन्य रिश्तेदार जैसे मां आदि उत्तराधिकार के लागू कानून के अनुसार आपकी सम्पदा में से हिस्से के हकदार होंगे।

  • अनेक लोगों का यह मानना है कि उनकी मृत्यु पर सब कुछ अपने आप ही उसके पति या पत्नी के नाम हो जाएगा। ऐसा अनिवार्य रुप से नहीं होता है तथा सम्पत्ति को सभी कानूनी वारिसों में बांटा जाता है। कभी कभी आपके प्रियजनों के लिए महत्व रखने वाली सम्पत्तियों तथा वस्तुओं को बेचना भी पड़ सकता है। कुछ मामलों में, जीवित पति/पत्नि के पारिवारिक घर को इसलिए बेचना पड़ता है ताकि बच्चों, मां तथा परिवार के अन्य सदस्यों को उनका हिस्सा दिया जा सके। यदि आपके कोई कानूनी वारिस नहीं हैं तो आपकी मृत्यु के बाद आपकी सम्पत्ति आदि को देश को सौंप दिया जाता है। तथा इससे भी बुरी स्थिति यह हो सकती है कि आपकी मृत्यु के बाद बिना किसी दिशा निर्देश (वसीयत) के आपकी सम्पत्ति पर कुछ अवांछनीय और अज्ञात व्यक्ति/व्यक्तियों द्वारा कब्जा कर लिया जाए।

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