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पौष्टिकता

संधिवात (रुह्मैटिस्म) और सचलता

बड़ी संख्या में वयोवृद्ध व्यक्तियों को जोड़ों की समस्याएं प्रभावित करती हैं। जोड़ों तथा मांसपेशियो में दर्द तथा तथा उनके कड़ा होने से आपकी सचलता प्रभावित हो सकती है। आपको इन लक्षणों से छुटकारा दिलाने के लिए आपके डाक्टर द्वारा आपके लिए दवाएं लिखी जा सकती हैं, फिजियोथेरापिस्ट द्वारा विशेष प्रकार के व्यायाम आदि के संबंध में सहायता प्रदान की जा सकती है और एक व्यावसायिक चिकित्सक द्वारा सचलता संबंधी उपस्करों और आपके जोड़ों की सुरक्षा करने के संबंध में सलाह दी जा सकती है। इस प्रकार की सहायता के लिए आपका डाक्टर आपको किसी फिजियोथेरापिस्ट अथवा व्यावसायिकक चिकित्सक के पास भेज सकता है।


सचलता संबंधी उपस्कर

यदि आपको सचलता संबंधी समस्याएं हैं तो अनेक प्रकार के “सचलता संबंधी उपस्कर”उपलब्ध हैं। यदि आपको अपने लिए एक उचित उपस्कर प्राप्त हो जाता है तो आपकी कमोबेश आत्मनिर्भरता पुन प्राप्त हो सकती है। सचलता संबंधी सबसे सुगम उपस्कर चलने फिरने के लिए प्रयोग की जाने वाली छड़ी (वॉकिंग स्टिक) है, जो कि उस समय उपयोगी हो सकती है जब आपकी एक टांग को अतिरिक्त सुपोर्ट की आवश्यकता होती है। यदि आपकी दोनो टांगों को सुपोर्ट की आवश्यकता है, तो आपको दो वाकिंग स्टिक्स, वाकिंग फ्रेम अथवा रोल्लेटर की आवश्यकता होती है। यदि आपके लिए चलना बिलकुल ही कठिन है तो आपको व्हीलचेयर की आवश्यकता है।

यह अवश्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आपकी वाकिंग स्टिक की लम्बाई सही है। जब आपकी बाजू को साइड में रखा जाता है तो यह कलाई की क्रीज तक ऊंची होनी चाहिए।यदि संतुलन बनाए रखने के लिए दो वाकिंग स्टिक्स को उपयोग में लाया जा रहा है तो वह लम्बी होनी चाहिए क्योंकि उन्हें आप सामने से पकडेंगें। वाकिंग स्टिक के नीचे एक रबड़ लगा हुआ होना चाहिए जिससे इसे फिसलने से रोका जा सकेगा। यह रबड़ का टुकड़ा जल्दी से घिस जाता है इसलिए इनकी नियमित जांच की जानी चाहिए। वाकिंग फ्रेम से और भी अधिक सुपोर्ट प्राप्त होती है, वह अधिक स्थिर होते हैं तथा इनसे विश्वास में भी बढ़ोतरी होती है। रोल्लेटर्स पहिए युक्त फ्रेम हैं जिन्हे इधर उधर करना सरल होता है। ऐसे लोग जिन्हे मध्यम किस्म की संतुलन समस्या है,यह उनके लिए लाभदायक होते हैं।

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